भुवनेश्वर: ओडिशा कांग्रेस में सब कुछ सामान्य चल रहा है या फिर पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है? यह सवाल एक बार फिर चर्चा में है।
हाल ही में कांग्रेस से निष्कासित तीन विधायकों ने एक स्थानीय न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में ओडिशा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। विधायकों ने आरोप लगाया कि प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में संगठन सही दिशा में नहीं बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भक्त चरण दास की राजनीतिक कार्यशैली से उन्हें आपत्ति है और उन्होंने उन पर BJD तथा BJP के साथ नज़दीकियों के आरोप भी लगाए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
हालांकि, इंटरव्यू का सबसे अहम पहलू यह रहा कि तीनों विधायकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी नाराज़गी कांग्रेस पार्टी या राहुल गांधी की नीतियों से नहीं है। उनका कहना है कि वे कांग्रेस की विचारधारा और राहुल गांधी के नेतृत्व के साथ खड़े हैं, लेकिन उनका विरोध केवल ओडिशा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास की कार्यप्रणाली से है।
इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में कई सवाल उठने लगे हैं।
क्या ओडिशा कांग्रेस में असंतोष सिर्फ तीन विधायकों तक सीमित है, या यह संगठन के भीतर किसी बड़े मतभेद का संकेत है?
क्या विधायकों की नाराज़गी वास्तव में प्रदेश नेतृत्व से है, या इसके पीछे कोई और राजनीतिक कारण है?
गौरतलब है कि हाल के महीनों में राज्यसभा चुनाव में कथित क्रॉस-वोटिंग के बाद कांग्रेस ने तीन विधायकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की थी और उन्हें निलंबित/निष्कासित करने के साथ विधानसभा अध्यक्ष से अयोग्यता की भी मांग की थी।
अब इन विधायकों के सार्वजनिक बयानों ने पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों की चर्चा को और तेज कर दिया है। हालांकि, इन आरोपों पर ओडिशा प्रदेश कांग्रेस या भक्त चरण दास की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी सभी की नजर रहेगी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ओडिशा कांग्रेस की चुनौती भाजपा और बीजेडी से मुकाबला है, या पहले उसे अपने संगठन के भीतर उठ रहे मतभेदों का समाधान करना होगा?
